
विभाजन की पीड़ा झेलकर सिन्ध से आए 12 बुजुर्गों का सम्मान, संघर्ष और पुरुषार्थ को किया नमन…

भारतीय सिन्धू सभा खंडवा द्वारा विभाजन विभीषिका – सिन्ध स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजन, नई पीढ़ी से इतिहास और संस्कृति से जुड़े रहने का आह्वान…
खंडवा। विभाजन विभीषिका एवं सिंधु स्मृति दिवस के अवसर पर भारतीय सिंधू सभा, खंडवा द्वारा श्री झूलेलाल मंदिर, सिंधी कॉलोनी में गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभाजन के समय सिंध से खंडवा आए समाज के 11 वरिष्ठ बुजुर्गों का सम्मान कर उनके संघर्ष, त्याग और पुरुषार्थ को नमन किया गया जिसमें गोविंदराम मोटवानी, पुरुषोत्तम मंगलानी, मोहनदास वासवानी, टीकमदास चावला, श्रीचंद पमनानी, विद्या पमनानी, राधा बाई वासवानी, भागी बाई जेठवानी, सावित्री बाई लधानी, कृष्णा बाई मंगलानी, राजकुमारी लालवानी, लक्ष्मण दास लालवानी जी का सम्मान किया गया…
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए भारतीय सिन्धू सभा युवा शाखा के राष्ट्रीय महामंत्री मनीष कुमार मलानी ने कहा कि “हम वह सौभाग्यशाली पीढ़ी हैं, जो विभाजन का दंश झेलने वाली अपने समाज की महान पीढ़ी को प्रत्यक्ष देख पा रहे है, आज उनका सम्मान कर रहे है और हमें उनके अनुभवों को सुनने का अवसर प्राप्त हुआ है। यह केवल सम्मान का कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, इतिहास और पूर्वजों के संघर्ष को स्मरण करने का अवसर है।”
पूज्य सिंधी पंचायत के मुख्य सलाहकार अनिल अनिल आरतानी ने कहा कि सिन्ध से विस्थापित होकर आए हमारे पूर्वजों ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने पुरुषार्थ , संस्कार और मेहनत के बल पर नई पहचान बनाई तथा देश के विकास एवं जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
*कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खंडवा के जिला सह कार्यवाह मनीष जी जायसवाल जी ने उपस्थित समाज जनों को उद्बोधन देते हुए कहा कि “आज के समय में मुख्य रूप से समाज की युवा पीढ़ी को अपनी सभ्यता एवं संस्कृति से जुड़े रहने और विभाजन की पीढ़ा को स्मरण करते हुए इतिहास से सीखकर सशक्त भविष्य निर्माण करने व विभाजन का दंश झेलकर यहां आने वाली बुजुर्ग पीढ़ी के संघर्षों से प्रेरणा लेने की बात कही…14 अगस्त 1947 के दिन देश के बंटवारे के समय अपना मकान, दुकान, दौलत अपनी जन्मभूमि सबकुछ छोड़कर भी सिंधी समाज ने हिन्दू धर्म नहीं छोड़ा और विभाजन की असहनीय पीड़ा को झेलकर यहां आने के बाद शून्य से शुरू होकर शिखर तक पहुंचने वाले समाज ने आज भी अपने DNA और सभ्यता को सहज कर रखा और अपने धार्मिक मूल्यों के साथ राष्ट्र वादी विचारों पर अटल रहे…जैसे 1947 में विघटनकारी शक्तियों ने देश के दो टुकड़े किए वैसे ही आज भी देश विरोधी ताकतें समय – समय पर देश को तोड़ने का प्रयास कर रही है , ऐसे समय में इन प्रयासों को विफल करने के लिए सिंधी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका हो सिद्ध हो सकती है…यही सबसे सही समय है जब युवा पीढ़ी द्वारा विभाजन के दर्द को याद कर, भारत को अखंड बनाए रखने के लिए देश में पल रही विघटनकारी राष्ट्र विरोधी शक्तियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है…”*
कार्यक्रम में खंडवा विधायक श्रीमती कंचन मुकेश तनवे एवं महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव ने भी सिंध से आए वरिष्ठ बुजुर्गों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लिया। दोनों ने विभाजन के समय सिंधी समाज द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को स्मरण करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सिंधी समाज ने अपने पुरुषार्थ, उद्यमिता, संस्कार और सामाजिक एकजुटता के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं।
कार्यक्रम में भाजपा जिला महामंत्री धर्मेंद्र जी बजाज, पूर्व जिलाध्यक्ष सेवा दास जी पटेल एवं युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष सागर आरतानी, सिंधी समाज के पुरोहित श्याम जी शर्मा एवं गोपाल जी भारद्वाज की विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का संचालन भारतीय सिंधू सभा, खंडवा के महामंत्री महेश चंदवानी ने किया।
इस अवसर पर पूज्य सिंधी पंचायत के कार्यवाहक अध्यक्ष मोहन जी दीवान, मुख्य सलाहकार अनिल आरतानी, सिंधी सेवा मंडली के अध्यक्ष संजय सभनानी , महिला शाखा अध्यक्ष कोमल होतवानी,
सभा के युवा शाखा जिला महामंत्री अमित हिंदुजा, राजेश परचानी, किशोर लालवानी, मनोहर संतवाणी, मूलचंद फतवानी, द्वारका मोहनानी, हरीश तलरेजा, कमलेश पमनानी, अभिषेक मंगवानी, रानी खेमानी, दीपा हिंदुजा, पूनम लालवानी, कशिश गिदवानी सहित पूज्य सिंधी पंचायत के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा अन्य समाजजन उपस्थित रहे।








